मानव कब जगेगी तेरी चेतना शून्य हुई क्या प्रकृति प्रेम वंदना। मानव कब जगेगी तेरी चेतना शून्य हुई क्या प्रकृति प्रेम वंदना।
बस जाए कोई ऐसा नगर। अवधपुरी हो त्रेताकाल की। जैसे अवधपुरी हो त्रेता काल की।। बस जाए कोई ऐसा नगर। अवधपुरी हो त्रेताकाल की। जैसे अवधपुरी हो त्रेता काल की...
अभी उगा है सूर्य धरा पर, अभी खिली है धूप। अभी उगा है सूर्य धरा पर, अभी खिली है धूप।
बुन लूँ उमंगों की चूनर, लगा लूँ माथे से धरा। बुन लूँ उमंगों की चूनर, लगा लूँ माथे से धरा।
जीवन के संग्राम में हम करें आभार उसी परमात्मा का। जीवन के संग्राम में हम करें आभार उसी परमात्मा का।
तुम बसे हो मुझ में, देह में दिल हो ज्यूँ मौन हर्फ हो चेतना के, कैसे समझाऊं तुम बसे हो मुझ में, देह में दिल हो ज्यूँ मौन हर्फ हो चेतना के, कैसे समझ...